सारी दुनियां के धार्मिक ग्रंथों में मोक्ष की अवधारणा है। तो क्या है यह मोक्ष? इसी सवाल का जवाब प्रस्तुत पुस्तक में तलाश किया गया है। पृष्ठभूमि के रूप में आत्मा, परमात्मा, प्रलय, खण्ड व आत्यंतिक प्रलय आदि को समझाया गया है। जीवात्मा क्या है, देह में कैसे आती है, आत्मा जीव भाव से किस तरह मुक्त हो सकती है? इनकी भी विवेचना है। यह स्पष्टतः समझाया गया है कि मुक्ति भी एक अवस्था ही है – निर्विकार हो जाना, वीतराग हो जाना, निर्लिप्त रह जाना, सारे संचित भोग संस्कार समाप्त हो जाना ही जीव मुक्ति है। अजन्म की अवस्था आत्यंतिक मुक्ति है - अंतिम जन्म और मृत्यु। फिर न जन्म, न मृत्यु।

मोक्ष का सत्य