अनार्य संस्कृति के महानायक लंकेश या रावण अथवा दशानन पर यह एक सकारात्मक पुस्तक है। इसमें राम–रावण युद्ध को दो विपरीत सुस्कृतियों का महासंग्राम बताया गया है। साथ ही रावण के पांडित्य, शौर्य, चरित्र, सोच, औदात्य आदि का तर्कसम्मत विश्लेषण है। सीता, मंदोदरि, रावण आदि से संबद्ध लोक कथाओं का अधिकतम संग्रह भी उपलब्ध है। यह शोधपरक आलोचनात्मक प्रबंध है। इसमें सुर, असुर, राक्षस, दानव, दैत्य, देवता आदि अवधारणाओं की भी समीक्षा है। लंका कहां है? इसे विस्तार से लिखा गया है। मेघनाद वध केसे हुआ? उसमें हनुमान की क्या भूमिका रही? यह स्पष्ट किया गया है।

दशानन चरित